Thursday, May 21, 2015

पक्की-सच्ची ...

चलो लिखें, हम भी लिखें
एक कविता अच्छी लिखें 

लूटा-लाटी …
चूमा-चांटी …
बांटा-बांटी …

पक्की लिखें, सच्ची लिखें
पर, चोरी की कुछ न लिखें ?

Wednesday, May 6, 2015

मुहब्बत का हिसाब ...

तस्वीरों की खूबसूरती तो महज इक इत्तफाक है 'उदय'
सच तो ये है कि - उनकी धड़कनों में बसती है कविता ?
सच ! वो सवालों पे सवाल दाग देंगे 'उदय'
गर, जुर्रत की, गिरेबां झांकने की तुमने ?

चाहें, न चाहें, देख कर तुझको, अदब से हाथ उठ जाता है आदाब को
समझ से परे है दोस्त, हम तेरे दीवाने हैं या तेरे कातिलाना नूर के ?

रंज … गम … औ मुहब्बत का हिसाब मत पूछो
कभी हारे … कभी जीते … मगर नुक्सान में हैं ?

Tuesday, April 21, 2015

इक इंतेहा कहानी ...

खूब जुदा है, अदा उसकी 'उदय'
न मिलती है
न बिछड़ती है
'खुदा' जाने …
दोस्त है वो, या रकीब है, 

अब … क्या बयां करूं
कैसे बयां करूं
जख्म हैं, पर निशां नहीं हैं,

उफ़ …
बस …
सिर्फ …
दर्द की इक इंतेहा कहानी है ?

Tuesday, April 7, 2015

जुनून-ए-इश्क ...

'खुदा' जाने किन कांधों पे उठेगा जनाजा उनका
वो जिनसे मिलते हैं तीखी जुबां से मिलते हैं ?
सच ! कुछ ख्याल - कुछ मिजाज, होंगे उनके भी अलग
पर उतने नहीं होंगे 'उदय', जितने हम उनसे अलग हैं ?
… 
कैसा रंज, कैसा गम, औ कैसी शिकायतें
सच ! हम वाकिफ हैं तुम्हारी हरकतों से ?
… 
सच ! मुफलिसी तू छोड़, कुछ और बातें करें
सब जानते हैं, यहीं सब छोड़ के जाना है ??
सच ! जुनून-ए-इश्क में परखच्चे उसके उड़ गए
जिसका नाम था, कल तक, बुलंद इमारतों में ?


Sunday, March 22, 2015

23 मार्च …

क्यूँ इश्क के लिए इबादत करें
रंज-औ-गम तू छोड़, कुछ और बातें करें
गर इश्क में ही मरना है
तो चल वतन से मुहब्बत करें, 
 
तनिक ख्याल-औ-मिजाज बदल के देख
फिर देख, खौल तू लहू का
गर समंदर की लहरें भी न फीकी पड़ जायें
तो तू पानी समझ, मेरा लहू बहा देना, 
 
वर्ना, कब तक रोता-बिलखता रहेगा तू
झूठी मुहब्बत में …
आ संग मेरे, एक सच्ची मुहब्बत करें
रंज-औ-गम तू छोड़, कुछ और बातें करें ? 


~ श्याम कोरी 'उदय'