Sunday, March 22, 2015

23 मार्च …

क्यूँ इश्क के लिए इबादत करें
रंज-औ-गम तू छोड़, कुछ और बातें करें
गर इश्क में ही मरना है
तो चल वतन से मुहब्बत करें, 
 
तनिक ख्याल-औ-मिजाज बदल के देख
फिर देख, खौल तू लहू का
गर समंदर की लहरें भी न फीकी पड़ जायें
तो तू पानी समझ, मेरा लहू बहा देना, 
 
वर्ना, कब तक रोता-बिलखता रहेगा तू
झूठी मुहब्बत में …
आ संग मेरे, एक सच्ची मुहब्बत करें
रंज-औ-गम तू छोड़, कुछ और बातें करें ? 


~ श्याम कोरी 'उदय'

हिन्दी ...

हिन्दी की कुछ पक्की लिखें
गुरु-चेले की सच्ची लिखें 


मंच लिखें …
दंडवत लिखें …
तमगे लिखें … 


चलो लिखें, हम भी लिखें
एक कविता अच्छी लिखें ? 

~ श्याम कोरी 'उदय'

Saturday, March 14, 2015

दिल-धड़कन ...

लिखते लिखते थक न जाऊँ …
औ अधर्मी न कहलाऊँ …
यही सोच कर चुप बैठा हूँ, 

वर्ना, … 
क्या मंदिर, औ क्या मस्जिद, …
जगह जगह हो कर आया हूँ, 

जब चाहूँ …
तब मैं लिख दूँ … 
हैं मंदिर-मस्जिद … दोनों सूने,

सच तो ये है …
'खुदा' बसा है दिल में मेरे …
और 'राम' बसे धड़कन में … ?

Sunday, March 8, 2015

बधाई व शुभकामनाएँ ....

तू जल -
तू ही अग्नि है,
तू धरा -
तू ही आकाश है,

तू पवन -
तू फूल -
तू ही खुशबू है,

तू जान -
तू जहान -
तू ही जीवन है,

तू स्त्री -
तो मैं पुरुष हूँ
तू नहीं -
तो मैं कुछ भी नहीं हूँ !

~ श्याम कोरी 'उदय'