Wednesday, September 17, 2014

हुस्न औ जिस्म …

सच ! जब तक मिले नहीं थे उनके औ मेरे मिजाज 
कुछ वो भी अजनबी थे, कुछ हम भी थे अजनबी ?
… 
'उदय' क्या बताएगा ये तुम हम से पूछों यारो 
इश्क में, बड़े बड़े 'शेर' भी 'चूहे' नजर आते हैं ? 
… 
डगमग डगमग हैं हम, औ डगमग डगमग है दिल हमारा 
वो पास से गुजरे हैं ……… या भूचाल आया था 'उदय' ?
… 
उनसे मिलना भी इक बहाना था 
औ  
बिछड़ना भी …… इक बहाना है 
हुस्न औ जिस्म … 
बगैर करतब के कब मिलते हैं 'उदय' ?
… 
वो भी डरते हैं हम भी डरते हैं 
देखो ख्याल हमारे कितने मिलते हैं ? 

Wednesday, September 10, 2014

ख्याल ...

दिल भी तुम्हारा है औ हम भी तुम्हारे हैं
जी चाहे जितना चाहे तोड लो मरोड़ लो ?

या तो, अभी-अभी
या फिर, … वर्ना, … कोई बात नहीं !!!

बड़े इत्मिनान से 'रब' ने तराशा है उसे 
सिर से पाँव तक क़यामत सी लगे है ?

वो भी डरते हैं हम भी डरते हैं
देखो ख्याल हमारे कितने मिलते हैं ?

हुस्न औ जिस्म दोनों की अपनी अपनी कहानी है
कभी सोना, कभी पीतल, तो कभी माटी लगे हैं ?

इसे हम धुँआ कहें, या धुंध कहें हम 'उदय'
वो सामने होके भी दिख नहीं रहे हैं आज ? 

Tuesday, September 2, 2014

मिजाज ...

गर, खुबसूरती का, कोई पैमाना होता तो हम बताते
कि इन आँखों में तुम किस कदर बस गए हो आज ?
कच्ची मिट्टी का घरौंदा है अपना
सच ! आगे जैसी तुम्हारी मर्जी ?

न ठीक से वफ़ा, न बेवफाई
कुछ ऐसे हैं मिजाज उनके ?

सच ! चुकता किया है उन्ने कोई पुराना हिसाब-किताब
वर्ना, मंहगाई के इस दौर में कोई दिल तोड़ता है आज ?
तेरी खुबसूरती पे, एतबार नहीं है हमें
ये आँखों का भ्रम भी तो हो सकता है ?