Thursday, May 16, 2013

जलसा ...


चेले-चपाटों की आड़ में गुरु बार बार बच रहे हैं 'उदय' 
वर्ना, कौन नहीं जानता, गुरुमंत्र दिया उन्होंने ही है ? 
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भू-भा, भा-भू, की लड़ाई में ये तो कमाल हो गया 
जो न भू था, और न भा था, वो जीत गया 'उदय' 
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उनकी फनकारी के, हम कायल हैं 'उदय', गर शोर थमा नहीं तो 
वे उसे, रेल से उतार कर,............हवाई जहाज में चढ़ा देंगे ??
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रंगों में रंगने की बात होती, तो हम रंग जाते  
उनकी शर्त थी, कि - हमसे हो जाओ तुम ??
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जिसकी अंतिम साँसें भी आजाद नहीं थीं 'उदय' 
उसकी लाश पे, सजा है गजब का जलसा यारो ? 
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Friday, May 10, 2013

चिट-फंड ...


क्या खूब गिड़-गिड़ा रहे हैं गिगिरगिट्टे 
जिन्होनें वक्त रहते रंग नहीं बदला ? 
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जोर उनका चलता नहीं है 
वर्ना, वो पिछवाड़े भी लगा के घूम लेते लाल बत्ती ? 
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मौत उसकी भी 'उदय',.....रंग ला रही है 
तमाम हिजड़ों की जुबाँ लप-लपा रही है ? 
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वक्त-वक्त की बात है 'उदय' 
वही कुत्ता, वही शेर है ????
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सरकार उनकी है, और खुद सरकार भी हैं वो 
चिट हो या हो फंड, कौन क्या बिगाड़ लेगा ? 
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Saturday, May 4, 2013

पैंतरेबाजी ...


खेत उनका, खलिहान उनका, और अब तो फसल भी हुई है उनकी 
कैसे ?.. आखिर वे सरकार हैं, व्यापारी हैं, और दलाल भी तो हैं ??
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हमारा उनसे 'उदय', कुछ इनडायरेक्ट सा कनेक्शन है 
भरी महफ़िल में, कैसे रु-ब-रु हो जाएँ हम उनसे ???
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किसने रोका है तुम्हें, कस के बरस जाया करो 
बन के बूँद-बूँद,......अब और न सताया करो ?
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उनकी राजनैतिक पैंतरेबाजी भी कमाल की है 'उदय' 
बिन पेंदी के होकर भी कहीं न कहीं थम ही जाते हैं ?
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वो अपने ख़्वाबों में सारी दुनिया जला लेते हैं 
बात जब उठी, तो एक बिड़ी न सुलगी उनसे ?
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